नवरात्रि का आठवां दिन माता महागौरी कि आराधना को समर्पित श्री महंत डॉ रवींद्र पुरी

नवरात्रि का आठवां दिन माँ महागौरी की आराधना को समर्पित है। माँ महागौरी को देवी दुर्गा का आठवाँ स्वरूप माना जाता है, जिनका वर्ण अत्यंत गौर और उज्ज्वल है।
कठोर तपस्या के कारण माँ पार्वती का शरीर काला पड़ गया था, तब भगवान शिव ने गंगाजल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर हो गया और वे महागौरी कहलायीं।
उनका यह रूप पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक है। वे भक्तों के समस्त पापों और कष्टों को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
माँ महागौरी चार भुजाओं वाली हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू होता है तथा अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में रहते हैं। उनका वाहन वृषभ है, जो धर्म और स्थिरता का प्रतीक है।
इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से सफेद वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं और माँ को नारियल तथा सफेद मिठाई का भोग लगाते हैं।
ऐसा विश्वास है कि सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन की कठिनाइयाँ समाप्त होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है।
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद लिया जाता है। यह दिन आत्मशुद्धि, सद्भाव और नई ऊर्जा का संदेश देता है।
माँ महागौरी की कृपा से जीवन में उज्ज्वलता, सौभाग्य और सकारात्मकता का संचार होता है तथा भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
इस दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ महागौरी की कृपा से आपके जीवन में शांति, समृद्धि और उजाला बना रहे।
यह पावन दिन हमें आत्मशुद्धि, सद्भाव और सेवा भाव का संदेश देता है। कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति के सम्मान और संस्कारों की महत्ता का स्मरण कराया जाता है।
माँ की असीम कृपा से सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य और नई ऊर्जा का संचार हो, यही मंगलकामना है। जय माता दी।
माँ भगवती मनसा देवी का आशीर्वाद आप सब पर सदैव बणा रहे। हर हर महादेव।



