भारतीय संस्कृति में नाग पंचमी का विशेष महत्व श्री महंत डॉ रविंद्रपुरी

भारतीय संस्कृति में नाग पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और सनातन आस्था के प्रति सम्मान का प्रतीक है। श्रावण मास के इस पावन पर्व पर भगवान शिव के प्रिय नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की जाती है।
सनातन परंपरा में नागों को पूजनीय मानते हुए उनके प्रति श्रद्धा और संरक्षण का भाव रखा गया है।
नाग पंचमी हमें यह संदेश देती है कि सृष्टि के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व की भावना को महत्व देती आई है। नाग देवता की आराधना इसी व्यापक दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिसमें मनुष्य अपने जीवन के साथ-साथ प्रकृति और समस्त जीव-जगत के कल्याण की कामना करता है।
भगवान शिव के गले में विराजमान नाग उनकी शक्ति, निर्भयता और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक हैं। भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन मुद्रा भी नागों की पवित्रता और धार्मिक महत्व को दर्शाती है। नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक नाग देवता का स्मरण करते हैं और जीवन में भय, संकट तथा नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
इस पावन अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि प्रकृति और उसके प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, संवेदना और संरक्षण का भाव बनाए रखेंगे। हमारी आस्था तभी सार्थक होगी, जब उसके साथ जीव-जगत के प्रति दया और पर्यावरण के संरक्षण की भावना भी जुड़ी हो।
नाग देवता की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का वास हो, यही मंगलकामना है।
ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नागः प्रचोदयात्।
आप सभी को नाग पंचमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।



