नारी शक्ति का प्रतीक राजमाता अहिल्याबाई होलकर श्री महंत डॉ रविंद्रपुरी

मराठा साम्राज्य की महान शासिका, कुशल योद्धा और नारी शक्ति की सर्वोच्च प्रतीक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। मालवा साम्राज्य की बागडोर संभालते हुए उन्होंने न केवल प्रशासनिक और सैन्य मोर्चे पर अद्भुत कुशलता का परिचय दिया, बल्कि अपनी प्रजा को पुत्रवत मानकर न्यायप्रिय और कल्याणकारी शासन की मिसाल कायम की। उनका जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक सशक्त महिला अपने साहस, विवेक और दृढ संकल्प से इतिहास की धारा बदल सकती है।
पति खांडेराव होल्कर और श्वसुर सूबेदार मल्हारराव होल्कर के निधन के पश्चात् विकट परिस्थितियों में भी महारानी अहिल्याबाई ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व स्वयं किया और विरोधियों के षड्यंत्रों को अपनी युद्ध रणनीति तथा कूटनीति से ध्वस्त कर दिया। एक कुशल योद्धा के रूप में उन्होंने न केवल राज्य की सीमाओं की रक्षा की, बल्कि इंदौर को एक समृद्ध और सुदृढ़ साम्राज्य के रूप में स्थापित किया।
अहिल्याबाई का शासनकाल कल्याणकारी कार्यों का स्वर्णिम युग माना जाता है। उन्होंने शिक्षा, व्यापार, कृषि और महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा दिया। संपूर्ण भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करते हुए उन्होंने काशी विश्वनाथ, सोमनाथ और महाकालेश्वर जैसे प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों का पुनरुद्धार कराया तथा अनगिनत धर्मशालाओं, घाटों और तालाबों का निर्माण करवाया। महारानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर उनका स्मरण हमें उनके त्याग, स्वाभिमान, न्यायप्रियता और अद्वितीय नेतृत्व से सदैव प्रेरित करता रहेगा।


