सनातन धर्म में एकादशी का अधिक महत्व है श्री महंत डॉ रवींद्र पुरी

कामिका एकादशी के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो तथा आपके परिवार पर सदैव प्रभु का आशीर्वाद बना रहे। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है।
सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण, पूजन, व्रत और दान-पुण्य करने से मन को शांति तथा जीवन को सकारात्मक दिशा मिलने की मान्यता है।
कामिका एकादशी हमें अपनी आत्मिक शुद्धि के साथ-साथ अपने विचारों और कर्मों को पवित्र बनाने की प्रेरणा देती है। इस पावन दिन भगवान श्रीहरि का ध्यान करते हुए सत्य, संयम, करुणा, सेवा और सदाचार को अपने जीवन का आधार बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि अपनी बुरी आदतों और नकारात्मक विचारों पर विजय प्राप्त करने का अवसर भी है। जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष को त्यागकर प्रेम तथा भक्ति का मार्ग अपनाता है, तब उसके जीवन में वास्तविक शांति का अनुभव होता है।
इस पावन अवसर पर हमें भगवान विष्णु की आराधना के साथ जरूरतमंदों की सहायता, गौ सेवा, अन्नदान और परोपकार जैसे कार्यों के लिए भी आगे आना चाहिए। धर्म का वास्तविक स्वरूप तभी सार्थक होता है, जब हमारी आस्था हमारे आचरण में दिखाई दे और हमारे कर्मों से किसी के जीवन में प्रसन्नता आए।
कामिका एकादशी हमें यह संदेश देती है कि श्रद्धा के साथ किए गए सत्कर्म जीवन को सार्थक बनाते हैं और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।
भगवान श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना है कि कामिका एकादशी के इस पावन पर्व पर सभी के जीवन से दुख, संकट और नकारात्मकता दूर हो तथा प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।
प्रभु सभी को सद्बुद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें। आइए, इस पावन एकादशी पर हम सभी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान श्रीहरि का स्मरण करें तथा अपने जीवन में सेवा, सत्य और सदाचार को अपनाने का संकल्प लें। आप सभी को कामिका एकादशी की हार्दिक मंगलकामनाएं। जय श्रीहरि विष्णु।

