14 अगस्त विभाजन विभीषिका श्री महंत डॉ रविंद्रपुरी

14 अगस्त का दिन भारत के इतिहास में एक ऐसी पीड़ा और वेदना की स्मृति लेकर आता है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर हम उन सभी निर्दोष नागरिकों, माताओं-बहनों, बच्चों और उन वीर बलिदानियों को सादर नमन करते हैं, जिन्होंने देश के विभाजन के दौरान असहनीय पीड़ा, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उनका त्याग और बलिदान हमारी राष्ट्रीय स्मृति का अभिन्न हिस्सा है।
विभाजन के समय लाखों लोगों को अपने घर, खेत, व्यवसाय और जन्मभूमि छोड़कर अनजान स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। असंख्य परिवार बिछड़ गए और अनेक लोगों ने अपना सर्वस्व खो दिया। यह इतिहास हमें बताता है कि सामाजिक सौहार्द, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता कितने अनमोल हैं। उन कठिन परिस्थितियों में भी लोगों ने साहस, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत के दुखों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से सीख लेने का संकल्प भी है। हमें ऐसा समाज और राष्ट्र बनाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए, जहां एकता, भाईचारा, सद्भाव और राष्ट्रहित सर्वोपरि हों। इतिहास की पीड़ादायक घटनाओं से सीख लेकर ही हम भविष्य को अधिक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बना सकते हैं।
आज इस स्मृति दिवस पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों और पीड़ित परिवारों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्हें सादर नमन है। आइए, हम संकल्प लें कि भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को सदैव मजबूत बनाए रखेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की सच्चाइयों से परिचित कराते हुए राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध की भावना जागृत करेंगे। देश की एकता और अखंडता ही उन सभी बलिदानों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।



