राष्ट्रभक्ति सेवा ओर सामाजिक समरसता का संदेश श्री महंत डॉ रविंद्रपुरी

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस विशेष
राष्ट्रभक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश
श्री महंत डॉ. रवींद्र पुरी जी के नाम से
15 अगस्त भारत के इतिहास का वह गौरवशाली दिन है, जब हमारा देश स्वतंत्रता के नए युग में प्रवेश कर सका। यह दिन हमें उन अनगिनत वीर स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को स्मरण करने और उन्हें पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लेने का पावन पर्व है।
भारत की स्वतंत्रता हमें लंबे संघर्ष और असंख्य बलिदानों के बाद प्राप्त हुई। आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे वीर शहीदों का अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनका अटूट समर्पण है। इसलिए हमारा दायित्व है कि हम स्वतंत्रता के मूल्यों—एकता, अखंडता, समानता, सद्भाव और राष्ट्रसेवा—को अपने जीवन में उतारें।
श्री महंत डॉ. रवींद्र पुरी जी का संदेश भी राष्ट्रहित, धर्म, संस्कृति और समाजसेवा की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। भारत की सनातन संस्कृति ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मार्ग दिखाया है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को और मजबूत करें।
आज का भारत युवा शक्ति, ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। देश की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक हो।
इस स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि देश की एकता और अखंडता को सदैव सर्वोपरि रखेंगे, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करेंगे, जरूरतमंदों की सहायता करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त, संस्कारित एवं समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
आइए, स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर हम अपने वीर शहीदों को नमन करें और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और मजबूत करें।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!
भारत माता की जय!
— श्री महंत डॉ. रवींद्र पुरी जी



