महाशिवरात्रि के दिन हुआ भव्य पूजन भगवान शंकर आश्रम मंसूरी में

*श्रावण महाशिवरात्रि संपन्न*
सबसे जल्दी मुग्ध होने वाले
भगवान हैं महादेव : आर्यम
(शिव सहस्त्रनाम से हज़ारों पुष्पों से अनुष्ठान !)
(विश्वभर से 400 भक्त जुड़े शिव पूजा में! )
मसूरी(देहरादून)। 11 अगस्त ।श्रावण मास की महा शिवरात्रि के अवसर पर मसूरी स्थित भगवान शंकर आश्रम में भव्य एवं दिव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अनुष्ठान में सहभागिता हेतु गूगल मीट का आह्वान किया गया था जिसके माध्यम देश और दुनिया भर से 400 भक्तों ने इस पूजा में भाग लिया।
परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के सानिध्य में इस पूजा के माध्यम से शिव नाम की गूंज समस्त विश्व में गूँजी।आर्यम जी ने स्पष्ट किया कि भगवान शिव को आशुतोष भी कहा जाता है जिसका शाब्दिक अभिप्राय है एक लोटा जल के अर्पण से प्रसन्न होने वाले देवता । महादेव देवों के देव हैं वे बहुत सहजता से मुग्ध हो जाते हैं ।
आर्यम जी महाराज के अनुसार श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे सावन की शिवरात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि सावन मास स्वयं शिव को अत्यंत प्रिय है। इसी पावन अवसर पर भगवान शंकर आश्रम में परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के दिव्य सानिध्य में महाशिवरात्रि सिद्धि अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसने समस्त भक्तजनों को शिव तत्व से जोड़ा। इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि शिव केवल एक देवता मात्र नहीं, अपितु समस्त ब्रह्मांड के संचालक एवं मूल ऊर्जा के स्रोत हैं। जीवन का हर स्पंदन, प्रत्येक श्वास और विज्ञान द्वारा वर्णित इलेक्ट्रॉन तक शिव तत्व का ही रूप है। गुरुदेव ने कहा कि यदि मनुष्य अपने भीतर शिव के प्रति समर्पण और शुद्धि लाए, तो वह स्वयं शिवमय हो सकता है। उन्होंने अर्धनारीश्वर स्वरूप को स्त्री-पुरुष के भीतर के संतुलन एवं अद्वैत का प्रतीक बताया, वहीं महाकाल के स्मरण को संसार की क्षणभंगुरता का बोध कराकर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करने वाला बताया।
शिव सहस्त्रनाम एवं शिव तांडव स्तोत्र के पावन मंत्रोच्चार के मध्य गुरुदेव आर्यम जी ने भगवान शिव का विशेष पुष्पार्चन संपन्न कराया। इस पूजा में धतूरे का फूल एवं फल, दूर्वा, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष के पुष्प, आर्किड, गेंदा, गुलाब, कमल, भांग के पत्ते, मदार के पुष्प, चंदन की रूह, केसर तथा पान के पत्तों का विशेष रूप से प्रयोग किया गया, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। पूजा में सम्मिलित सभी भक्तों ने श्वेत वस्त्र धारण किए, जो भगवान शिव के शुभ्र, निर्मल एवं वैराग्य स्वरूप का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है।
इस दिव्य अनुष्ठान में लगभग 30 भक्तजन प्रत्यक्ष रूप से आश्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने साक्षात इस पावन पूजा का लाभ प्राप्त किया। उपस्थित सभी भक्तों को चंदन तिलक लगाकर शिव तत्व से आशीर्वादित किया गया तथा प्रत्येक भक्त को रुद्राक्ष माला भेंट स्वरूप प्रदान की गई। यह रुद्राक्ष माला भगवान शिव की कृपा एवं सुरक्षा कवच के रूप में भक्तों के जीवन में सदैव उनके साथ रहेगी, ऐसा आशीर्वाद गुरुदेव द्वारा प्रदान किया गया।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि सनातन धर्म एवं हिंदुत्व के क्षेत्र में गुरुदेव आर्यम जी द्वारा किए जा रहे इस अद्वितीय एवं अतुलनीय कार्य की चतुर्दिक गूँज हो रही है। लुप्त होते जा रहे वैदिक अनुष्ठानों एवं परंपराओं को पुनर्जीवित कर गुरुदेव समस्त विश्व में सनातन संस्कृति की अलख जगा रहे हैं। उनके इस पुनीत प्रयास से असंख्य लोगों का जीवन रूपांतरित हो रहा है और वे आध्यात्मिक जागृति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। गुरुदेव का यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
माँ यामिनी श्री
(अधिशासी प्रवक्ता)
आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन
मसूरी, देहरादून, भारत।
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