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शिव आराधना का दिवस है महाशिवरात्रि श्री महंत रवींद्र पुरी

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति और जीवन के गूढ़ सत्य को समझने का अवसर है।
देवों के देव भगवान शिव सादगी, त्याग, तपस्या और करुणा के प्रतीक हैं। वे हमें सिखाते हैं कि शक्ति का वास्तविक अर्थ विनम्रता और संतुलन में है। हिमालय की शांति में लीन शिव हमें यह संदेश देते हैं कि बाहरी शोर के बीच भी भीतर की शांति को बनाए रखना ही सच्ची साधना है।
महाशिवरात्रि की रात्रि को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव और शक्ति का पावन मिलन हुआ था, जो सृष्टि में संतुलन और ऊर्जा का प्रतीक है। भक्तजन उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, घी, शहद तथा बेलपत्र से करते हैं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप मन को निर्मल बनाता है और आत्मा को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
यह पर्व हमें अपने भीतर के अंधकार को दूर कर ज्ञान और प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
भगवान शिव का व्यक्तित्व अत्यंत सरल किंतु गहन है। उनके गले का सर्प निर्भयता का, जटाओं से बहती गंगा पवित्रता का और मस्तक पर विराजमान चंद्रमा शीतलता और धैर्य का प्रतीक है।
नीलकंठ स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में आने वाले विष को भी धैर्यपूर्वक स्वीकार कर उसे सकारात्मकता में बदलना ही महानता है।
आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में महाशिवरात्रि हमें ठहरकर आत्मचिंतन करने का अवसर देती है। यह पर्व बताता है कि सच्ची शक्ति बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सदाचार में निहित है।
आइए इस पावन दिन हम अपने जीवन से अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लें तथा प्रेम, दया और सद्भाव को अपनाएं।
भगवान शिव से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें। उनकी कृपा से हमारे परिवारों में आनंद और समाज में एकता बनी रहे।
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई दिशा लेकर आए।
माँ भगवती मनसा देवी का आशीर्वाद आप सब पर बणा रहे। हर हर महादेव।

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