सनातन धर्म का वैश्विक आयाम स्थापित कर रहे हैं गुरुदेव

*सनातन धर्म को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रहे गुरुदेव आर्यम*
*देवघर में आर्यम ज्योतिर्लिंगम बैद्यनाथ महोत्सव संपन्न,
झारखंड का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र देवघर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए विश्वविख्यात है वहाँ आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा माघी पूर्णिमा को आर्यम ज्योतिर्लिंगम बैद्यनाथ महोत्सव संपन्न हुआ। पूजा में लगभग 200 श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कर ईश्वर का ध्यान किया। यह आयोजन परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के पावन सानिध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज ने सभी ईश्वर भक्तों को संबोधित करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग की दिव्यता और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत प्राचीन है। यहाँ भगवान शिव स्वयं ‘वैद्यनाथ’ के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर शिवलिंग प्राप्त किया। परंतु देवताओं की प्रेरणा से भगवान गणेश ने उसे देवघर की इस पवित्र भूमि पर स्थापित कर दिया। क्रोधित रावण ने अंगूठे से शिवलिंग को दबाया, जिसके चिह्न आज भी विद्यमान हैं। यहाँ भगवान शिव इच्छाओं को पूर्ण करने वाले और दोषों को हरने वाले वैद्य के रूप में प्रसिद्ध हैं।
गुरुदेव आर्यम ने अपने उपदेश में विशेष रूप से बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम की पावन भूमि पर भगवान शिव के आशीर्वाद से संपन्न होने वाला आर्यम अनुष्ठान केवल व्यक्तिगत कल्याण का ही साधन नहीं है, बल्कि यह पितृ शांति और पाप मुक्ति का भी अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने समझाया कि भगवान शिव पितरों के स्वामी माने जाते हैं और उनकी कृपा से पूर्वजों की आत्मा को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। भारतीय संस्कृति में पितृ तर्पण की प्राचीन परंपरा रही है, जिसमें हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं एवं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। गुरुदेव के मार्गदर्शन में किया गया यह अनुष्ठान इसी पवित्र परंपरा को आगे बढ़ाता है। जब महादेव के ज्योतिर्लिंग के सानिध्य में पितृ तर्पण और अनुष्ठान संपन्न होते हैं, तो उनका फल कई गुना बढ़ जाता है और पूर्वजों को सद्गति प्राप्त होती है।
इस विशेष अनुष्ठान में पुष्पार्चन और अग्निहोत्र का आयोजन किया गया, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पवित्र अग्नि में विशिष्ट आहुतियां प्रदान की गईं। गुरुदेव ने बताया कि अग्निहोत्र वह दिव्य माध्यम है जो हमारे दोषों का शमन करता है और वातावरण को पवित्र बनाता है। पुष्पार्चन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पुष्प समर्पित करते हुए भगवान बैद्यनाथ से पितरों की सद्गति और मोक्ष की कामना की। गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि इस अनुष्ठान से न केवल पितृ दोष का निवारण होता है, बल्कि साधक के जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने गुरुदेव आर्यम के वैश्विक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज सनातन धर्म की ज्योति को विश्वभर में प्रज्वलित करने का महान कार्य कर रहे हैं। गुरुदेव आर्यम की दिव्य शिक्षाएं और आध्यात्मिक दीक्षा आज विश्व के कोने-कोने में उनके समर्पित शिष्यों के माध्यम से फैल रही है। उनका मार्गदर्शन न केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करने का एक सशक्त आंदोलन है, जो समाज में धार्मिक चेतना और सद्भाव का संचार कर रहा है।
आज के इस आयोजन को सफल बनाने में सोमनाथ आर्यम, मनोज कुमार अनुज, ध्रुव तिवारी , लीना चौबे, प्रीतेश आर्यम, राकेश रघुवंशी, रोहित वेदवान, आदित्य तिवारी , श्वेता जयसवाल, चंद्र पाल शर्मा , अविनाश आदि का योगदान रहा ।
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माँ यामिनी श्री
(अधिशासी प्रवक्ता)
आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन
मसूरी , देहरादून,भारत।
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