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बालिकाएं दे रही है समाज को नई दिशा श्री महंत डॉ रविंद्रपुरी

आज के आधुनिक युग में हमारी बालिकाएं न केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रह गई हैं, बल्कि वे मातृ शक्ति के रूप में समाज की प्रगति का प्रतीक बन चुकी हैं।
विज्ञान, ज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उनकी उन्नति देखकर गर्व होता है। कल्पना चावला से लेकर सुनीता विलियम्स तक, भारतीय बालिकाओं ने अंतरिक्ष में अपनी पहचान बनाई है।
राकेशा शर्मा की उड़ान के बाद अब पीढ़ियां बदल रही हैं, जहां युवा लड़कियां रॉकेट लॉन्च कर रही हैं और सैटेलाइट डिजाइन कर रही हैं।
ये बालिकाएं स्कूलों से निकलकर आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में टॉप कर रही हैं। चंद्रयान मिशन में महिलाओं की भूमिका हो या इसरो की वैज्ञानिकों की टीम, हर जगह उनकी बुद्धिमत्ता चमक रही है।
मंगलयान को सस्ते में सफल बनाने वाली महिलाएं आज नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। लेकिन यह सब संयोग नहीं, बल्कि उनके अथक परिश्रम और सपनों की उड़ान का परिणाम है।
वे साबित कर रही हैं कि मातृ शक्ति केवल घर संभालने तक सीमित नहीं, बल्कि ब्रह्मांड को जीतने वाली शक्ति है। फिर भी, हमें यह समझना होगा कि अभी भी कई बाधाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को शिक्षा का अवसर कम मिलता है, सामाजिक रूढ़ियां उन्हें पीछे धकेलती हैं।
लेकिन आधुनिक भारत में बदलाव आ रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं फल दे रही हैं। हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए – चाहे वह शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप हो, खेल के मैदान पर मौके दें या विज्ञान लैब में प्रवेश।
माता-पिता, शिक्षक और समाज सबको मिलकर उन्हें आगे बढ़ाना होगा।सोचिए, अगर हर बालिका को समान अवसर मिले तो भारत चांद-मंगल पर नहीं, बल्कि सूर्य तारा पर अपना झंडा गाड़ सकता है।
हमें उनके सपनों को पंख देना चाहिए, क्योंकि एक सफल बालिका पूरे परिवार और राष्ट्र को ऊंचाई पर ले जाती है। आज की लड़कियां कल की शक्ति हैं – उन्हें प्रोत्साहित करें, सहयोग दें, ताकि मातृ शक्ति का ज्योति पूरे ब्रह्मांड में फैल जाए।
माँ भगवती मनसा देवी का आशीर्वाद आप सब पर सदैव बणा रहे। हर हर महादेव।

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