उत्तराखंडहरिद्वार

राष्ट्रहित एवं जनकल्याण हेतु महादेव के परम उपासक परम पूज्य महामण्डलेश्वर कैलाशानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज जी द्वारा अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव का पूरे श्रावण मास प्रतिदिन लगभग 10 से 12 घण्टे होने वाले महारुद्राभिषेक का शुभारंभ।

विश्व विख्यात पौराणिक सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मन्दिर, नीलधारा गंगा तट, चण्डीघाट, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) पर आराध्य देवाधिदेव महादेव का महारुद्राभिषेक अनुष्ठान का शुभारंभ श्रावण मास के प्रथम सोमवार 06जुलाई, 2020 से हो रहा है। श्रावण मास में जब भगवान भोलेनाथ एक माह तक हरिद्वार में रहकर सृष्टि का संचालन करते हैं तब पूज्य गुरुदेव महामण्डलेश्वर कैलाशानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज जी पौराणिक सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मन्दिर, नीलधारा गंगा तट, चण्डीघाट, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में प्रतिदिन 10 से 12 घण्टे एक आसन पर बैठकर विद्वानों के साथ अपने आराध्य भगवान कैलाशेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन करते हैं, जिसमें कई हजार लीटर गंगा जल, गौदुग्ध, गौघृत, शहद, दही, इत्र, खस, भांग, चंदन, भस्म, गुलाब जल, नारियल जल और विभिन्न प्रकार की दुर्लभ वस्तुओं द्वारा अभिषेक एवं दुर्लभ पुष्पों से श्रृंगार कर अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव को सर्वाधिक प्रिय “शिव ताण्डव” सुनाने के पश्चात आरती की जाती है। पूरे एक माह तक पूज्य गुरुदेव 23 घण्टे का मौन व्रत रखते हैं केवल एक घंटा ही बोलते हैं। प्रतिदिन गंगा स्नान करते, गंगा जल ही पीते, सूक्ष्म फलाहार के साथ केवल एक बार गौदुग्ध का सेवन करते हैं और गंगा के रेत से बने आसन पर ही शयन करते हैं। एक माह तक मन्दिर परिसर से बाहर नहीं जाते हैं और न ही उन्हें कोई स्पर्श करता है। सम्पूर्ण मास पर्यन्त चलने वाले लोक एवं राष्ट्र कल्याण अनुष्ठान के स्वयं ही यजमान रहते हैं। इस अनुष्ठान में सफेद नाग- नागिन, काला नाग-नागिन, बिच्छू, और एक अजगर के रूप में बाबा कामराज जी स्वयं प्रत्यक्ष रूप से विचरण करते हैं और भक्तों को अनुभूति एवं दर्शन देकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दुर्लभ अनुष्ठान में देश के कोने-कोने से आने वाले हजारों भक्त सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। पूज्य गुरु जी का यह अनुष्ठान 28वर्षों से अनवरत चल रहा है।

भगवान शिव को श्रावण मास एवं सोमवार का दिवस प्रिय है इसलिए श्रावण के प्रत्येक सोमवार को शिवभक्तों पर कृपा करने के लिए भगवान अपने गण रूप में भक्तों को दर्शन की अनुभूति कराते हैं। श्रावण मास में शिव एवं शक्ति के अनूठे दर्शन तथा अनुष्ठान से साधक और भक्तों को जिस आत्मशांति की अनुभूति गंगा के नीलधारा तट पर होती है, शायद अन्यत्र भक्तों को ऐसी मानसिक शांति का अनुभव नहीं होता।

जय माई
हर हर महादेव

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