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सिर्फ अर्जुन ही नहीं, संजय ने भी सुना था श्रीकृष्ण का गीता उपदेश; संजय ने धृतराष्ट्र को सुनाया था ये ज्ञान :स्वामी राम भजन वन

श्रीकृष्ण के मुख से प्रकट हुए ग्रंथ श्रीमद् भगवद् गीता की जयंती है। इस ग्रंथ में सफलता के साथ ही सुख-शांति पाने के सूत्र बताए गए हैं। महाभारत युद्ध के समय अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस तिथि पर मोक्षदा एकादशी का व्रत भी किया जाता है।

श्रीकृष्ण ने सिर्फ अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, लेकिन ये उपदेश अर्जुन के साथ ही संजय ने भी सुना था। संजय ने धृतराष्ट्र को ये ज्ञान सुनाया था। गीता का प्रसंग महाभारत ग्रंथ का ही एक अंग है। वेद व्यास जी ने महाभारत बोली थी और गणेश जी ने लिखी थी।

संजय को वेद व्यास ने दी थी दिव्यदृष्टि

संजय धृतराष्ट्र के प्रिय सेवक थे। जब महाभारत युद्ध शुरू होने वाला था, तब वेद व्यास धृतराष्ट्र को दिव्यदृष्टि देना चाहते थे, ताकि वे युद्ध देख सके, लेकिन धृतराष्ट्र ने इसके लिए मना कर दिया था। इसके बाद व्यास जी ने धृतराष्ट्र के कहने पर संजन को दिव्य दृष्टि दी।

संजय ने महल में रहकर दिव्यदृष्टि की मदद से युद्ध का आंखों देखा हाल धृतराष्ट्र को सुनाया था। युद्ध में हो रही एक-एक घटना संजय ने धृतराष्ट्र को बताई थी।

ये है गीता उपदेश का प्रसंग

महाभारत युद्ध की शुरुआत होने वाली थी। कौरव और पांडव पक्ष की सेनाएं आमने-सामने खड़ी थीं। उस समय अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि वे रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले चलें। श्रीकृष्ण ने अर्जुन की बात मानी और रथ दोनों सेनाओं के बीच ले गए। वहां से अर्जुन ने कौरव पक्ष में भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और अन्य कुटुंब के लोगों को देखकर युद्ध करने का विचार त्याग दिया।

अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि मैं ये युद्ध नहीं करना चाहता।

इतना कहकर अर्जुन ने धनुष-बाण नीचे रख दिए।

श्रीकृष्ण समझ गए कि अर्जुन मोह और संदेह में उलझ हैं। इसके बाद भगवान ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। ये उपदेश संजय ने भी सुना और धृतराष्ट्र को सुनाया।

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