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सीख- जीवन में सुख-शांति चाहते हैं तो नशा, जुआं, हिंसा और गलत कामों से बचें :श्री महंत रवींद्र पुरी

परीक्षित बहुत बुद्धिमान और धर्म के जानकार व्यक्ति थे। पांडवों के जाने के बाद परीक्षित बहुत अच्छी तरह राज-पाठ चला रहे थे। एक दिन वे कहीं जा रहे थे, उस समय उन्होंने रास्ते में देखा कि एक काला व्यक्ति गाय और बैल को मार रहा है।

परीक्षित तुरंत वहां पहुंच गए और उस काले व्यक्ति, गाय और बैल से उनका परिचय पूछा। गाय ने कहा कि मैं धरती हूं। बैल बोला कि मैं धर्म हूं। गाय और बैल को मारने वाला व्यक्ति बोला कि मैं कलियुग हूं।

कलियुग बोला कि अब द्वापर युग खत्म हो गया है और ये मेरे आने का समय है। मैं सबसे पहले धरती और धर्म पर प्रहार करता हूं। आप द्वापर युग के अंतिम राजा हैं तो अब आप कलियुग को यानी मुझे धरती पर आने की अनुमति दीजिए।

परीक्षित ने सोच-विचार किया और कहा कि तुम जगहों से प्रवेश कर सकते हो- जहां नशा हो, जहां जुआं हो, जहां हिंसा हो और चौथी जगह है जहां व्यभिचार हो यानी महिला-पुरुष के बीच गलत संबंध हो।

कलियुग ने कहा कि इन चार रास्ते के अतिरिक्त मुझे एक रास्ता और दीजिए। तब परीक्षित ने कहा कि जहां सोना (स्वर्ण) हो, वहां से भी तुम प्रवेश कर सकता है यानी जहां लोग गलत तरीके से धन कमाते हैं, वहां से भी तुम प्रवेश कर सकते हो।

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