UNCATEGORIZED

एकमात्र ग्रंथ है श्रीमद् भागवत गीता, जिसे भगवान ने कहा है: गीता के सूत्र सिखाते हैं जीने की कला :स्वामी राम भजन वन

 कई पौराणिक ग्रंथ हैं और इनकी रचना इंसानों ने ही की है, लेकिन श्रीमद् भागवत गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाया है। श्रीकृष्ण के मुख से प्रकट होने की वजह से श्रीमद् भागवत गीता का महत्व सबसे अधिक है। ये एकमात्र हैं, जिसकी जंयती मनाई जाती है।

सभी वेदों, उपनिषद और पुराणों का सार है गीता

 श्रीमद् भागवत गीता में सभी वेद, उपनिषद और पुराणों का सार है। इस ग्रंथ का पाठ करने से और इसमें बताए गए सूत्रों को जीवन में उतारने से हमारी सभी समस्याएं खत्म हो सकती हैं। ग्रंथ में कर्म, भक्ति और ज्ञान मार्ग के बारे में बताया गया है। इस ग्रंथ के 18 अध्यायों में श्रीकृष्ण के उपदेश हैं। इन उपदेशों से हमारी सभी शंकाएं दूर होती हैं और हम जीवन में सफलता के साथ ही सुख-शांति भी हासिल कर सकते हैं।

जीने की कला सिखाती है गीता

गीता हमें जीने की कला सिखाती है। गीता का मूलमंत्र यह है कि हमें हर स्थिति में कर्म करते रहना है। कभी भी निष्काम न रहें, क्योंकि कर्म न करना भी एक कर्म ही है और हमें इसका भी फल जरूर मिलता है।

Close