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नवरात्रि की परंपराएं:देवी मां के लिए व्रत-उपवास या पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो छोटी कन्याओं को पढ़ाई से जुड़ी चीजें दान करें;श्री महंत रवींद्र पुरी

शुक्रवार को नवरात्रि की पंचमी तिथि है और इस दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मंगलवार, 4 अक्टूबर को नवरात्रि की अंतिम तिथि नवमी है। नवरात्रि में देवी मां के लिए व्रत-उपवास और विशेष पूजा करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक जो लोग नवरात्रि में समय अभाव या किसी अन्य वजह से देवी पूजा या व्रत-उपवास नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें धर्म-कर्म से जुड़े दूसरे काम जरूर करना चाहिए। जैसे छोटी कन्याओं को पढ़ाई की चीजें दान करें।

छोटी कन्याएं होती हैं देवी मां का स्वरूप

श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के तृतीय स्कंध में लिखा है कि दो वर्ष की कन्या कुमारी, तीन साल की कन्या त्रिमूर्ति, चार साल की कन्या कल्याणी, पांच साल की कन्या रोहिणी, छ: साल की कन्या कालिका, सात साल की कन्या चंडिका, आठ साल की कन्या शांभवी और नौ साल की कन्या दुर्गा का रूप होती है। दस साल की कन्या को सुभद्रा कहते हैं। देवी का स्वरूप होने से छोटी कन्याओं की पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद कन्याओं को दान-दक्षिणा भी दी जाती है।

जो लोग नवरात्रि में देवी पूजा नहीं कर पा रहे हैं, वे लोग जरूरतमंद कन्याओं को पढ़ाई की चीजें दान करें। कन्याओं को जूते-चप्पल, कपड़े, अनाज और धन का दान भी करें। कन्याओं के लिए किए गए इन धर्म-कर्मों से भी देवी पूजा के समान ही पुण्य मिल सकता है।

नवरात्रि में ये बातें भी ध्यान रखें

घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। घर की पवित्रता बनाए रखना चाहिए।

इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। आलस का त्याग करें। सुबह जल्दी उठें।

सभी प्रकार के नशे से दूर रहें। मांसाहार न करें। संतुलित आहार लें। माता-बहन के साथ ही अन्य महिलाओं का सम्मान करने का संकल्प लें।

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