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गलत लोगों की संगत और गलत सोच की वजह से इंसान ऐसे काम कर देता है जो उसे करना नहीं चाहिए:श्री महंत रवींद्र पुरी

रामायण की किस्सा है। रावण ने सीता का हरण कर लिया था। श्रीराम पूरी वानर सेना के साथ लंका पहुंच गए थे। श्रीराम और रावण का युद्ध शुरू हो गया था। श्रीराम और लक्ष्मण रावण के कई योद्धाओं को मारते जा रहे थे।

उस समय रावण ने अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाया। कुंभकर्ण बहुत शक्तिशाली और विद्वान था। रावण ने कुंभकर्ण को पूरी बात बताई। कुंभकर्ण ने रावण से कहा कि भाई, आपने ये काम सही नहीं किया है। श्रीराम कोई सामान्य इंसान नहीं हैं। देवी सीता का हरण करके आपने पूरी लंका को संकट में दिया है।

कुंभकर्ण की ये बातें सुनकर रावण ने सोचा कि अभी ये धर्म की बातें कर रहा है तो उसने कुंभकर्ण के सामने मांस-मदिरा रखवा दीं। कुंभकर्ण ने मांस खाया, शराब पी। अब कुंभकर्ण की बुद्धि पलट गई थी। मांस-मदिरा की वजह से कुंभकर्ण को नशा हो गया और वह श्रीराम से युद्ध करने के लिए तैयार हो गया।

युद्ध के मैदान में कुंभकर्ण से विभीषण ने कहा कि मैंने अपने भाई रावण को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने मुझे ही लात मारकर निकाल दिया। इसके बाद मैंने श्रीराम के पास शरण ली है।

कुंभकर्ण बोला कि भाई, तूने अच्छा काम किया है, लेकिन, मैंने रावण के दिए हुए मांस-मदिरा का सेवन कर लिया है, अब मैं रावण के बंधन में हूं। सही-गलत जानते हुए भी मुझे श्रीराम से युद्ध करना होगा। इसके बाद कुंभकर्ण ने श्रीराम से युद्ध किया और श्रीराम के हाथों मारा गया।

जीवन प्रबंधन

सही और गलत, हम सभी जानते हैं, फिर भी गलत लोगों की संगत और गलत विचारों की वजह से हम सही बातें नजरअंदाज कर देते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जो हमें नहीं करना चाहिए। बाद में हमें अपने गलत कामों की वजह से पछतावा होता है। इसलिए अपनी गलत सुधारें और गलत विचारों से बचें।

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