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द्वादशी व्रत 11 जून को:इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और तीर्थ में स्नान-दान करने से मिलता अश्वमेध यज्ञ करने जितना पुण्य :स्वामी राम भजन वन

ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के त्रिविक्रम और वामन अवतार की पूजा की जाती है। इसे त्रिविक्रम द्वादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही जाने-अनजाने में हुए पाप भी खत्म होते हैं। इस दिन उपवास करने का विधान ग्रंथों में बताया गया है। उपवास का शाब्दिक अर्थ है उप यानी समीप और वास का अर्थ है पास में रहना। यानी भोजन और सभी सुखों का त्याग कर के भगवान को अपने करीब महसूस करना ही उपवास है।

स्नान-दान करना अश्वमेध यज्ञ के बराबर
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर गंगा और यमुना सहित किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। इस तिथि पर मथुरा में यमुना जल में तिल मिलाकर नहाने के बाद भगवान विष्णु की पूजा, फिर जल और अन्न के साथ ही तिल का दान करने से अश्वमेध यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है।

उपवास करने से गोमेध यज्ञ का पुण्य
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर उपवास रखते हुए भगवान विष्णु की पूजा और अभिषेक करने का विधान है। पूजा में तुलसी पत्र और शंख में जल-दूध भरकर अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से गोमेध यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है।

ऐसे करें पूजन
ज्येष्ठ महीने की द्वादशी पर सूर्योदय से पहले तिल के पानी से नहाने और फिर भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा ग्रंथों में बताई है। इस तिथि पर नहाने के बाद सफेद या पीले कपड़े पहनकर सोलह प्रकार की चीजों से भगवान विष्णु की पूजा करें। इस दिन पंचामृत के साथ ही शंख में दूध और जल मिलाकर भगवान का अभिषेक करने का विशेष विधान बताया गया है। इसके बाद तुलसी पत्र चढ़ाकर आम या अन्य मौसमी फलों का नैवेद्य लगाएं।

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