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जीवन मंत्र:सफलता न मिले तो निराश नहीं होना चाहिए, लगातार कोशिश करने से मंजिल जरूर मिलती है:श्री महंत रवींद्र पुरी

महात्मा बुद्ध के प्रवचन सुनने कई लोग रोज आते थे। प्रवचन सुनने वालों में एक व्यक्ति ऐसा था जो बुद्ध की बातें बहुत ध्यान से सुनता था। उस व्यक्ति को लगता था कि बुद्ध की बातें तो अच्छी हैं, लेकिन जीवन में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है।

एक दिन बुद्ध कह रहे थे, ‘अगर कोई व्यक्ति आपके ऊपर गुस्सा करता है तो वह अपना खुद का नुकसान करता है, लेकिन अगर आप भी गुस्से का उत्तर गुस्से से देते हैं तो आप उससे भी ज्यादा खुद का नुकसान करते हैं।’

ये बात सुनते ही वह व्यक्ति भड़क उठा और बोला, ‘मैं इतने दिनों से आपको सुन रहा हूं, लेकिन मन में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है तो आपके प्रवचन सुनने से क्या लाभ है?’

बुद्ध ने उस व्यक्ति से पूछा, ‘तुम रहते कहां हो?’

व्यक्ति ने जवाब दिया, ‘मैं श्रावस्ती में रहता हूं।’

बुद्ध ने फिर पूछा, ‘यहां से श्रावस्ती की दूरी कितनी होगी और आने-जाने में कितना समय लगता है?’

उस व्यक्ति ने दूरी बता दी और ये भी बता दिया कि आने-जाने में कितना समय लगता है। इसके बाद बुद्ध ने फिर पूछा, ‘आना-जाना कैसे करते हो?’

व्यक्ति ने कहा, ‘मैं कोई न कोई सवारी ले लेता हूं।’

बुद्ध ने कहा, ‘एक बात बताओ, क्या तुम बैठे-बैठे वहां पहुंच सकते हो?’

उसने कहा, ‘बैठे-बैठे कैसे पहुंच सकते हैं, इसके लिए या तो सवारी करनी होगी या पैदल जाना होगा।’

बुद्ध बोले, ‘ठीक इसी तरह चल कर ही लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। तुम जिस लक्ष्य के लिए आए हो, वह शांति है, आत्मा है। तुम सोच रहे हो, वहां ऐसे ही पहुंच जाओगे। इसमें समय भी लगता है। हर रोज सत्संग करोगे, विचारों का मंथन करोगे तो हो सकता है कि तुम एक दिन अपने लक्ष्य पर पहुंच जाओगे।’

सीख

बुद्ध ने यहां संदेश दिया है कि हमें कभी भी निराश नहीं होना चाहिए। सतत प्रयास करते रहने से ही मंजिल मिलती है। अगर कोई व्यक्ति प्रयास करने में ही निराश हो जाए और बार-बार यही सोचता रहे कि मैंने प्रयास किए, लेकिन परिणाम नहीं मिला तो वह व्यक्ति अपने लक्ष्य के अंतिम पड़ाव पर ही थक जाएगा और काम अधूरा रह जाएगा। इसलिए हमें हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए।

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