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जीवन मंत्र:बीते समय से सीख लें, वर्तमान के लिए सतर्क रहें और भविष्य पर नजर रखें::श्री महंत रवींद्र पुरी

महाभारत में खांडव वन में अर्जुन की वजह से आग लग गई थी। उस समय वन की आग में मयासुर नाम का एक राक्षस जलने वाला था और अर्जुन ने उसके प्राण बचा लिए थे।

मयासुर ने अर्जुन से कहा, ‘आपने वन की आग से मुझे बचाया है, इस उपकार के बदले आप बताइए, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?

अर्जुन ने कहा, ‘आपने इतनी बात मुझसे कही है, बस यही मेरे लिए उस उपकार का बदला हो गया है। अब आप जा सकते हैं और ऐसा ही प्रेम हमेशा मुझसे बनाए रखिए।’

मयासुर बोला, ‘मैं दानवों का विश्वकर्मा हूं। शिल्प विद्या का जानकार हूं। मैं अद्भुत निर्माण करता हूं। मैं आपकी कुछ न कुछ सेवा तो करना चाहता हूं।’

अर्जुन ने साफ मना करते हुए कहा, ‘मुझे आपकी कोई सेवा नहीं चाहिए। अगर आप सेवा करना ही चाहते हैं तो श्रीकृष्ण से पूछ लीजिए, इनका कोई काम हो तो वह कर दीजिए।’

अर्जुन ने सोचा था कि श्रीकृष्ण भी मना ही करेंगे, लेकिन श्रीकृष्ण दूरदृष्टि रखकर कोई भी निर्णय लेते थे। श्रीकृष्ण ने मयासुर से कहा, ‘तुम पांडवों के बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर के लिए एक सभा भवन बना दो। सभा भवन ऐसा बनाना कि जो भी उसे देखे वह हैरान हो जाए।’

मयासुर की युधिष्ठिर से बात हुई और उसने एक अद्भुत सभा भवन बना दिया। उस समय अर्जुन को समझ आया कि श्रीकृष्ण कितना आगे की सोचते हैं। उस सभा भवन से दुनिया को पांडवों की शक्ति का पता लग गया और पांडवों को रहने के लिए सुंदर महल भी मिल गया था।

सीख

विद्वान लोगों की यही विशेषता है कि वे जो भी निर्णय लेते है, उसमें भविष्य जरूर देखते हैं। समय बदलते देर नहीं लगती, इसलिए व्यक्ति को बीते हुए समय से सीख लेकर वर्तमान के लिए सतर्क रहना चाहिए और भविष्य पर नजर रखनी चाहिए।

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