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:तीन बड़े योगों में मनेगी गंगा सप्तमी, स्नान-दान ;स्वामी राम भजन

वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी के दिन गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा देवी की पूजा-अर्चना करने से एवं गंगाजल से स्नान करना मनोकामना पूर्ण करता है और पापों का क्षय होता है। इसके साथ ही पितृ दोष की शांति के लिए यह दिन शुभ माना जाता है।

इस साल गंगा सप्तमी पर तिथि, वार और ग्रह-नक्षत्रों से मिलकर तीन शुभ योग बनेंगे। इस कारण ये पर्व और खास हो गया है। इस महा संयोग में व्हीकल, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी और कपड़ों की खरीदारी करना शुभ रहेगा। साथ ही इस दिन गृह प्रवेश और नई शुरुआत करना भी फलदायी रहेगा। इस दिन गंगा के किनारे श्राद्ध करने से पितृ दोष खत्म होता है और अकाल मृत्यु वाले पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

 इस साल गंगा सप्तमी पर रवि पुष्य, श्रीवत्स और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे। वहीं, सप्तमी तिथि शनिवार दोपहर करीब 3 बजे शुरू हो जाएगी। जो अगले दिन शाम 5 बजे तक रहेगी। रविवार को सूर्योदय के वक्त सप्तमी तिथि होने से 8 मई को तीन महायोगों के संगम के साथ मनाई जाएगी। इस दिन श्रीवत्स योग के साथ मुहूर्त राज माना जाने वाला रवि पुष्य योग भी बन रहा है। रवि पुष्य योग सुबह स्थानीय सूर्योदय के साथ प्रारंभ हो जाएगा एवं दोपहर 2.56 बजे तक रहेगा। इसी समय सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा।

गंगा सप्तमी से जुड़ी मान्यता
1.
 शास्त्रों की मान्यता है कि वामन भगवान ने राजा बली से 3 पग भूमि नापते समय उनका तीसरा पग ब्रह्मलोक में पहुंच गया, वहां पर ब्रह्मा जी ने वामन भगवान का पद प्राक्षलन करके कमंडल में ले लिया, राजा सगर के 60 हजार मृत पुत्रों का उद्धार करने के लिए राजा भागीरथ के तप से प्रासन्न होकर गंगा जी शिव की जटाओं में आईं, यह शुभ दिन वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी का ही था।

2. ये भी कहा जाता है कि महर्षि जह्नु जब तपस्या कर रहे थे। तब गंगा नदी के पानी की आवाज से बार-बार उनका ध्यान भटक रहा था। इसलिए उन्होंने गुस्से में आकर अपने तप के बल से गंगा को पी लिया था। लेकिन बाद में अपने दाएं कान से गंगा को पृथ्वी पर छोड़ दिया था। इसलिए ये गंगा के प्राकट्य का दिन भी माना जाता है। तभी से गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा।

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