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प्रकृति का श्रृंगार है लोक पर्व फूलदेई श्री महंत रवींद्र पुरी

प्रेस विज्ञप्ति
प्रकृति के श्रृंगार का लोकपर्व है फूलदेई: श्री महन्त रविन्द्र पुरी
फूलदेई पर महाविद्यालय में किया गया कार्यक्रम आयोजित
काॅलेज के छात्र-छात्राओ प्राचार्य को फूल देकर मनाया फूल देई पर्व
हरिद्वार 14 मार्च, 2022 । एस.एम.जे.एन. पी.जी. काॅलेज में आज फूलदेई पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया गया.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, माँ मंशा देवी मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं काॅलेज प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष श्री महन्त रविन्द्र पुरी जी महाराज
ने अपने संदेश में काॅलेज के समस्त छात्र-छात्राओं व शिक्षिकाओं को फूलदेई पर्व की शुभकामना प्रेषित की. श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि फूलदेई प्रकृति के श्रृंगार का लोकपर्व है। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं परम्पराओं से जुड़ा प्रमुख पर्व है। हमें अपने लोक पर्वों एवं लोक परम्पराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास करने होंगे।
इस अवसर पर काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा ने फूलदेई पर्व की बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में फूलदेई पर्व मनाने की परम्परा है। यह त्यौहार पूरे उत्तरखण्ड राज्य में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, किसी भी समाज के विकास के लिए वहां के रीति-रिवाज और लोकपर्वों का विशेष योगदान होता है। डाॅ. बत्रा ने कहा कि इस शुभ पर्व पर हम सबको अपने नौनिहालों से घर की देहरी पर पुष्प वर्षा कराकर उन्हें शगुन तथा उपहार देकर इस त्यौहार को जीवन्त बनाये रखने के प्रयास करने चाहिए। हमारी लोक संस्कृति और परम्परायें हमें अपनी जड़ो से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होनें कहा कि जिस प्रकार फूल उच्चतम रचनाशीलता का परिचायक है उसी प्रकार यह त्यौहार भी हमारे छात्र-छात्राओं को रचनात्मक प्रेरणा दे, ऐसी मैं आशा करता हूँ। इस अवसर पर काॅलेज के छात्र झलक, अक्षत, गुणिका शर्मा, कृतिका तोमर, गंगा पाण्डेय, खुशी आदि ने प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा को फूलों की टोकरी भेट कर इस पर्व को जीवंत किया.
मुख्य अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. संजय कुमार माहेश्वरी ने शुभकामना देते हुए कहा कि लोकसंस्कृति तथा धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त महत्व है। उन्होंने इसके धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव जब तपस्या में लीन थे तो उस समय उनके गणों द्वारा फूलों के द्वारा उनकी तपस्या से जागृत किया गया जोकि प्रतीकात्मक रुप से प्रकृति के पुनः बसन्त ऋतु कोे अंगीकृत करने की ओर संकेत करती है। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार प्रकृति की उर्वरता को उत्सव के रुप में मनाने के रुप में देखा जाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य रूप से डाॅ. जगदीश चन्द्र आर्य, विनय थपलियाल, डाॅ. प्रज्ञा जोशी, डाॅ. विजय शर्मा, डाॅ. पदमावती तनेजा आदि सहित काॅलेज के अनेक छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहें।

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