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वर्तमान की शक्ति:जीवन एक क्षण में बदल सकता है, और वह क्षण यही है- वर्तमान :स्वामी राम भजन वन

  • इस समय आप क्या सोचते हैं इससे ही आपका भविष्य भी तय होता है। इसलिए, भले ही आप दुनिया की किसी भी समस्या से जूझ रहे हों- शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक या सामाजिक- आप उसमें इसी पल से सकारात्मक परिवर्तन लाना शुरू कर सकते हैं।
  • वर्तमान क्षण में जागरूकता के साथ विचार चुनिए और अपने जीवन को बदल डालिए।हममें से हर कोई अपने सभी अनुभवों के लिए स्वयं ज़िम्मेदार होता है। हमारा प्रत्येक विचार हमारा भविष्य बना रहा है। शक्ति का केंद्र हमेशा वर्तमान में होता है। हर कोई आत्म-द्वेष और अपराध-बोध का शिकार होता है। हर किसी के लिए आख़िरी वाक्य होता है, ‘मैं उतना अच्छा नहीं हूं।’ यह मात्र एक विचार है और विचार को हमेशा बदला जा सकता है। हम अपने शरीर में हर तथाकथित रोग को स्वयं उत्पन्न करते हैं। क्रोध, आलोचना और अपराध-बोध सबसे नुक़सानदेह विचार हैं। क्रोध को बाहर निकालने से कैंसर तक ठीक हो सकता है। हमें अतीत को भुलाकर सभी को क्षमा कर देना चाहिए। हमारे भीतर स्वयं से प्रेम करने की इच्छा चाहिए। हम वर्तमान में स्वयं को स्वीकार करके ही सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। जब हम स्वयं से सचमुच प्रेम करने लगते हैं तो जीवन में सबकुछ ठीक होने लगता है।
    हर क्षण एक नई शुरुआत है
    मैं फिर कहती हूं। ताक़त हमेशा वर्तमान क्षण में होती है। इन्हीं क्षणों में, यहीं पर और इसी समय हमारे अपने दिमाग़ में परिवर्तन होते हैं। यह कोई मायने नहीं रखता कि हम कितने लंबे समय से नकारात्मक विचारों में डूबे रहे हैं या किसी बीमारी या किसी ख़राब रिश्ते या आर्थिक संकट या आत्म-निंदा से जूझ रहे हैं। हम आज ही इनमें परिवर्तन लाना शुरू कर सकते हैं।
    अब आपकी अपनी समस्या को सच बने रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। वह अब समाप्त होते हुए शून्यता तक पहुंच सकती है, जहां से वह आई थी। आप ऐसा कर सकते हैं।
    याद रखिए, आप ही वह व्यक्ति हैं जो अपने दिमाग़ में सोचते हैं। आप स्वयं अपनी दुनिया में ताक़त और अधिकारी हैं। अतीत के आपके विचारों व विश्वासों ने इस क्षण को और इस क्षण तक हर क्षण को बनाया है। अब आप विश्वास करने और सोचने के लिए जो भी चुनते हैं, वह अगले क्षण को, अगले दिन को, अगले महीने को और अगले साल को गढ़ेगा।
    हां बंधु, आप! मैं आपको सबसे उम्दा सलाह दे सकती हूं, जो मेरे बरसों के अनुभव से आई है।
    अब भी आप वही पुराने विचारों को सोच सकते हैं, आप बदलने से इनकार कर सकते हैं और अपनी सभी समस्याओं को बनाए रख सकते हैं। अपनी दुनिया में आप सबसे ताक़तवर हैं। आप जो भी सोचने के लिए चुनते हैं, आपको वह मिलेगा।
    यह क्षण नई प्रक्रिया शुरू करता है। हर क्षण एक नई शुरुआत है और यह क्षण आपके लिए अभी और यहीं एक नई शुरुआत है। क्या यह जानना बड़ी बात नहीं है? यह क्षण शक्ति का क्षण है! इसी क्षण से परिवर्तन शुरू होता है।
    अभी आप क्या सोच रहे हैं?
    एक पल के लिए रुकें और अपने विचार को पकड़ें। आप इस समय क्या सोच रहे हैं? यदि यह सच है कि आपके विचार आपके जीवन को आकार देते हैं तो आप अभी जो भी सोच रहे हैं, क्या उसे अपने लिए सच बनाना चाहेंगे? यदि वह चिंता या ग़ुस्से या चोट या प्रतिशोध या डर का विचार है तो आपको क्या लगता है कि यह विचार किस तरह आपके पास लौटकर आएगा?
    हमेशा अपने विचारों को पकड़ना आसान नहीं होता है, क्योंकि वे बहुत तेज़ी से आगे बढ़ते हैं। फिर भी, हम अभी से अपनी बातों पर ध्यान रखना और सुनना शुरू कर सकते हैं। यदि आप ख़ुद को किसी प्रकार के नकारात्मक शब्द बोलते हुए सुनते हैं तो बीच में ही रुक जाएं। या तो उस वाक्य को बदल दें या बस छोड़ दें। आप उन्हें यह भी कह सकते हैं, ‘बाहर निकलो!’
    ख़ुद को किसी कैफ़ेटेरिया में पंक्ति में खड़े होने की कल्पना करें या किसी शानदार होटल के रेस्तरां में, जहां भोजन के व्यंजनों के बजाय विचारों के व्यंजन हैं। आप जिन विचारों को चुनना चाहें, उन्हें चुन सकते हैं। ये विचार आपके भविष्य के अनुभवों को उत्पन्न करेंगे।
    अब, यदि आप ऐसे विचारों को चुनते हैं जो समस्याएं और पीड़ा उत्पन्न करते हैं, तो यह मूर्खता है। यह इसी तरह है मानो आप हमेशा ख़ुद को बीमार बनाने वाला भोजन चुनते हैं। हम एक या दो बार ऐसा कर सकते हैं, लेकिन जैसे ही हमें पता चल जाता है कि कौन से खाद्य पदार्थ हमारे शरीर के लिए नुक़सानदेह होते हैं, हम उनसे दूर रहते हैं। विचारों के साथ भी ऐसा ही है। चलिए, ऐसे विचारों से दूर रहें, जो समस्याएं और पीड़ा उत्पन्न करते हैं।
    मेरे आरंभिक शिक्षकों में से एक डॉ. रेमंड चार्ल्स बार्कर बार-बार यह कहते थे, ‘जब कोई समस्या होती है तो वहां कुछ करने की नहीं बल्कि जानने की ज़रूरत होती है।’
    हमारा दिमाग़ हमारा भविष्य तय करता है। जब हमारे वर्तमान में कुछ ऐसा होता है, जो अवांछित है तो हमें उस स्थिति को बदलने के लिए अपने दिमाग़ का प्रयोग करना चाहिए। और हम उसी पल उसे बदलना शुरू कर सकते हैं।
    अपने मस्तिष्क को नियंत्रित कीजिए
    आपके भीतर एक अविश्वसनीय शक्ति और बुद्धिमत्ता है, जो आपके विचारों और शब्दों का जवाब दे रही है। जब आप जागरूकता सहित विचार चुनते हुए अपने मस्तिष्क को नियंत्रित करना सीख जाते हैं तो आप स्वयं को इस शक्ति के साथ लयबद्ध कर लेते हैं।
    यह मत सोचें कि आपका मस्तिष्क नियंत्रण में है। वास्तव में, अब तक आप मस्तिष्क के नियंत्रण में रहे हैं। लेकिन आप अपने मस्तिष्क को इस्तेमाल करते हैं। आप उन पुराने विचारों को सोचना बंद कर सकते हैं।
    जब आपकी पुरानी सोच वापस आकर कहने की कोशिश करती है, ‘परिवर्तन करना बहुत कठिन है’, तो अपने मन-मस्तिष्क को नियंत्रित करें। अपने मस्तिष्क से कहें, ‘मैं अब यह मानना चाहता हूं कि मेरे लिए परिवर्तन करना आसान होता जा रहा है। आप अपने मस्तिष्क के साथ यह वार्तालाप कई बार कर सकते हैं, ताकि उसे यह पता चल जाए कि आप नियंत्रक हैं और आपकी ही बात चलेगी।
    आप जिस एकमात्र बात पर नियंत्रण कर सकते हैं, वह आपका वर्तमान विचार है। आपके पुराने विचार जा चुके हैं, उनके संबंध में आप कुछ नहीं कर सकते, बस उनके द्वारा उत्पन्न अनुभवों को जी सकते हैं। आपका वर्तमान विचार, जिसे आप अब सोच रहे हैं, वही आपके नियंत्रण में है।
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