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जीवन मंत्र:कभी भी बुजुर्गों का मजाक न बनाएं, उनका सम्मान करें, वर्ना प्रकृति दंड जरूर देती है:श्री महंत रविंद्र पुरी

द्वारका के पास एक पिंडारक क्षेत्र था। उस जंगल में विश्वामित्र, असित, कर्ण्व, दुर्वासा, भृगु, अंगिरा, कश्यप, वामदेव, अत्रि, वशिष्ठ, नारद मुनि जैसे ऋषि-मुनि जीवन बीता रहे थे। उस समय तप करने के लिए ऋषि-मुनि ऐसे स्थान ढूंढते थे।

एक दिन श्रीकृष्ण के यदुवंश के कुछ युवा राजकुमार उस जंगल में पहुंचे। जवानी को जोश था, भटके हुए थे तो सभी ने विचार किया कि चलो इन साधु-संतों के साथ कुछ परिहास किया जाए, इनकी परीक्षा ली जाए।

राजकुमारों ने श्रीकृष्ण की एक पत्नी जामवंती के पुत्र सांब को साड़ी पहना दी और गर्भवती का वेश बना दिया। इसके बाद संतों से कहा कि आप बताइए कि इस गर्भवती कन्या को पुत्र पैदा होगा या पुत्री? आप लोग तो अंतर्यामी हैं, सब जानते हैं, बताइए।

ऋषि-मुनियों ने आंखें बंद कीं, ध्यान लगाया और समझ गए कि राजकुमार हमारा मजाक उड़ा रहे हैं, अपमान कर रहे हैं। तो गुस्से में संतों ने कह दिया कि इसके गर्भ से मूसल पैदा होगा और वो तुम्हारे वंश के नाश का कारण बनेगा।

सभी राजकुमार घबरा गए। जब उन्होंने साड़ी हटाई तो सचमुच एक मूसल निकला। बाद में यही मूसल कृष्ण के वंश के नाश का कारण बना था।

सीख – युवा अवस्था में विचारों का वेग अधिक होता है, इस कारण युवा गलत दिशा में जा सकते हैं। युवाओं को एक बात हमेशा समझाएं कि बड़े-बूढ़ों का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। बड़े लोगों की परीक्षा न लें, उनसे आशीर्वाद लें। जो गलती यदुवंश के राजकुमारों ने की थी, उसका दंड पूरे वंश को भोगना पड़ा था। अगर हम ऐसी गलती करेंगे तो प्रकृति किसी न किसी रूप में हमें दंडित जरूर करेगी। ये बात हमेशा ध्यान रखें।

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