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कार्तिक मास में करें इन नियमों का पालन वरना नहीं मिलेगा पूजा का पूरा फल:स्वामी राम भजन वन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। अगर इन नियमों का पालन ना किया जाए तो कार्तिक माह में किए गए व्रत-पूजन का फल प्राप्त नहीं होता है।

 

हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। कार्तिक मास को बहुत उत्तम और पवित्र माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही कार्तिक मास में तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। इस मास में दीपदान करना और पवित्र नदी में स्नान करने को भी फलदाई माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। अगर इन नियमों का पालन ना किया जाए तो कार्तिक माह में किए गए व्रत-पूजन का फल प्राप्त नहीं होता है। आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कार्तिक मास में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि कार्तिक मास में तुलसी पूजन और तुलसी रोपण से भगवान श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है। इस माह में तुलसी की सेवा करने से विवाह संबंधी समस्याएँ भी दूर होती हैं।

 

शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में दीपदान करने से अक्षय शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस माह में नदी, तालाब, घर के एक कोने और तुलसी के पेड़ पर दीपदान करना चाहिए।

 

कार्तिक मास को बहुत ही पवित्र मास माना जाता है इसलिए इस महीने में सात्विकता का पालन करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में माँस-मदिरा और धूम्रपान का सेवन वर्जित माना गया है।

 

शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में जमीन पर सोना चाहिए। इस पूरे माह में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। कार्तिक मास में जमीन पर सोने से मन शुद्ध रहता है और कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं भी दूर होती हैं।

कार्तिक मास में अपने मन और विचारों में पवित्रता लाएं। इस माह में खुद को मानसिक रूप से शांत और पवित्र रखें और सकारात्मक सोचें। किसी से घृणा, ईर्ष्या या किसी की निंदा ना करें और नकारात्मक विचारों को अपने मन में ना आने दें।

 

कार्तिक मास में उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई खाने की मनाही है। इस महीने में इन दालों के सेवन से पेट संबंधी रोग होने का खतरा अधिक रहता है।

 

कार्तिक मास में शरीर पर तेल लगाना भी वर्जित माना गया है। कार्तिक मास में केवल एक बार नरक चतुर्दशी के दिन ही शरीर पर  तेल लगाना चाहिए।

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