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नवरात्रि में करें इन मंत्रों का जाप, माँ दुर्गा दूर करेंगी आपके सभी कष्ट:स्वामी राम भजन वन

नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि नवरात्रि में माँ अपने भक्तों के कल्याण के लिए धरती पर आती हैं। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में कुछ मंत्रों का जाप करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।

हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। देवी दुर्गा के भक्तों के लिए नवरात्रि पर्व बहुत खास है क्योंकि यह महिषासुर नामक राक्षस पर माता की विजय का प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि नवरात्रि में माँ अपने भक्तों के कल्याण के लिए धरती पर आती हैं।  शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में कुछ मंत्रों का जाप करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि में माता को प्रसन्न करने के लिए किन मन्त्रों का जाप कर सकते हैं-

सिद्ध दुर्गा मंत्र / भय नाश मंत्र

सर्व स्वरूप सर्वेशे, सर्व शक्ति समन्वय

भये भ्यास्त्राही नो देवी, दुर्गे देवी नमोस्तुते

एत्त्ते वदानं सौम्य लोचन त्रैभुशीतम

पातु न सर्वभितिभ्या: कात्यायनि नमोस्तुते

 

सर्व बाधा मुक्ति मंत्र

सर्व वधविनरमुक्तो धन धान्य सुतनविता:

मनुश्यो मतप्रसादें भविष्यति न संशायम

 

माँ दुर्गा का मंत्र 

माँ दुर्गा को सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

 

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

 

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

नवार्ण मंत्र 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै

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